Friday, 16 December 2016

निवाला दस्तरख़्वान पर गिर जाये तो
कभी कभी निवाला दस्तरख़्वान पर गिर जाता है तो निवाला उठा कर खा लेना चाहिए। शैतान वसवसा डाले तो यह सोचे कि यह नेमत किसने दी है और अगर निवाला गन्दा होता पाक न होता तो अल्लाह पाक हमें उठाने का हुक्म क्यों देता हमें इस बात पर नज़र रखना चाहिए कि हमें अल्लाह के हुक्म मानने में हमेशा फ़ायादा होगा हमारी समझ में आए या न आए बहुत सी बातें हमारी समझ में नहीं आतीं फिर भी हम उन पर अमल करते हैं।
बरतन और उंगलियों को चाटने वालों को बहुत बुरी निगाहों से देखना
कुछ लोग बरतन और उंगलियों को चाटने को बहुत बुरी निगाहों से देखते हैं यह बहुत बुरी बात है यह सुन्नत है और किसी सुनन्त को बुरा जानना तो बहुत दूर की बात है बल्कि उसका हल्का जानना भी ईमान की कमज़ोरी का सबब है। खाने वाले भी इस बात का ख़्याल रखें के जहाँ यह अन्देशा हो कि ऐसे लोग मौजूद हैं जो इससे बुरी नज़र से देखेंगें तो वहाँ आख़िरी निवाले से प्लेट साफ़ कर ले ताकि लोग सुन्नत की तौहीन से बचें। बरतन अपने चाटने वालों के लिए दुआ करता है कि ऐ अल्लाह जिस तरह इसने मुझे शैतान से बचाया है तू इसे जहन्नम से बचा ले। साईंस ने भी साबित कर दिया है कि विटामिन भारी होने की वजह से बरतन में नीचे बैठे होते है लिहाज़ा बरतन चाटने के फ़ायदे साईंस ने भी बताये।
अगर बिस्मिल्लाह पढ़ना भूल जायें
दस्तरख़्वान नहीं उठाया गया है तो एक निवाला बिस्मिल्लाह पढ़ कर खा लें और दस्तरख़्वान उठा लिया गया है तो बिस्मिल्लाह पढ़ कर उंगलियाँ चाट लें और पूरा पढ़ें (بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیۡمِ)
खाने के आदाब
  • खाने से पहले और बाद में गट्टों तक हाथ धोना चाहिए।
  • बिस्मिल्लाह (بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیۡمِ) से खाना शुरू करें, अगर बिस्मिल्लाह न पढ़ी जाए तो शैतान शरीक हो जाता है।
  • खाने से पहले ये दुआ पढ़ ली जाये तो बीमारियों से बचा रहेगा और अगर खाने में ज़हर भी होगा तो इंशा अल्लाह असर नहीं करेगा-
بِسْمِ اللّٰہِ الَّذِیْ لَایَضُرُّ مَعَ اسْمِہِ شَیْءٌ فِی الْاَرْضِ وَلَا فِی السَّمَآءِ یَاحَیُّ يَاقَیُّوْمُ
(अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ जिसके नाम की बरकत से ज़मीन और आसमान की कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुंचा सकती। ऐ हमेशा से ज़िंदा व क़ायम रहने वाले।)
  • बैठ कर, जूता उतार कर खाना खायें और बायाँ पैर बिछा दें और दाहिना पैर खड़ा रखें या सुरीन (कूल्हों) पर बैठें या दोनों पैर खड़े रखें।
  • खड़े होकर न खायें।
  • दस्तरख़्वान बिछा लेना चाहिए।
  • दाहिने हाथ से तीन उंगलियों से खाना चाहिए बायें से न खायें क्योंकि शैतान बायें से खाता है।
  • तकिया लगा कर या नंगे सर खाना आदाब के ख़िलाफ़ है, बायें हाथ पर टेक लगा कर खाना भी मकरूह है।
  • खाना एक ही तरह का है तो अपनी तरफ़ से खाए इधर उधर हाथ न मारें।
  • खाने के बाद बरतन और उंगलियों को चाट लेना सुन्नत है।
  • खाना खाने के बाद अल्लाह का शुक्र करे और दुआ करें-
اَلْحَمْدُ لِلّٰہِ الَّذِیْ اَطْعَمَنَا وَسَقَانَا وَجَعَلَنَا مُسْلِمِیْنَ
(अल्लाह तआला का शुक्र है जिसने हमें खिलाया पिलाया और हमें मुसलमान बनाया)
  • खाने के बाद हाथ धोयें और गीले हाथ को मुँह सिर व कलाइयों तक हाथ का मसा कर लें यह खाने के बाद का वुज़ू है।
  • जब तुम में से कोई खाना खाये तो सीधे हाथ से खाए और जब पिए तो सीधे हाथ से पिये कि शैतान उल्टे हाथ से खाता पीता है ।
(सही मुस्लिम)
  • हर शख़्स बर्तन के उसी जानिब से खाए जो उस के सामने हो।
 (सही अलबुख़ारी हज़रत अनस बिन मालिक रज़ी अल्लाह ताला अन्हु से रिवायत)
  • इकठ्ठे होकर खाना खाओ और बिस्मिल्लाह पढ़ो तुम्हारे लिये इसमें बरकत होगी।
 (सुनन अबू दाऊद, इमाम अहमद, अबू दाऊद, इब्ने माजा, हाकिम और हशी बिन हरब  रज़ी अल्लाह ताला अन्हु से रिवायत)
  • खाने को ठंडा कर लिया करो कि गरम खाने में बरकत नहीं।
(अल मुसतदरक लिल हाकिम, हाकिम जाबिर रज़ी अल्लाह ताला अन्हा से रिवायत)
  • जब दस्तरख़्वान चुना जाये तो कोई शख़्स  दस्तरख़्वान से न उठे जब तक दस्तरख़्वान न उठा लिया जाये और खाने से हाथ न खींचे अगर्चे खाना खा चुका हो जब तक सब लोग फ़ारिग़ न हो जायें और अगर हाथ खींचना ही चाहता है तो मआज़रत पेश करे क्योंकि अगर बग़ैर मआज़रत किये हाथ रोक लेगा तो उसके साथ जो दूसरा शख़्स खा रहा है शर्मिन्दा होगा और वह भी हाथ रोक लेगा और शायद उसके खाने की हाजत अभी बाक़ी हो।    
  • खाना खाने बैठो तो जूते उतार लो ,इस में तुम्हारे लिए राहत है।
 (मिश्कात अल मसाबिह, अनस बिन मालिक ؓ से रिवायत)
  • जिस खाने पर बिस्मिल्लाह न पढ़ी जाये इस खाने को शैतान अपने लिए हलाल समझता है ।
(सही मुस्लिम, हज़रत हुज़ैफ़ा چ से  रिवायत )
  • जब तुम में से कोई खाना खाए तो उसे चाहिए कि पहले बिस्मिल्लाह पढ़े ।अगर शुरू में बिस्मिल्लाह पढ़ना भूल जाये तो यह कहेबिस्मिल्लाहि अव्वलुहू  वा आख़िरुहु, ।
(सुनन अबू दाऊद, हज़रत आईशा सिद्दीक़ा چ से मर्वी )
खाना खाने के बारे में कुछ अहादीस –
  • जो यह पसंद करे कि अल्लाह ताला उस के घर में बरकत ज़्यादा करे तो उसे चाहिए कि जब खाना हाज़िर किया  जाये तो वुज़ू करे और जब उठाया जाये तब भी वुज़ू करे। उलमा के मुताबिक इस हदीस शरीफ़ में वुज़ू से मुराद हाथ और मुँह की सफ़ाई करना है यानि हाथ धोना और कुल्ली करना।
(सुनन इबने माजा, हज़रत अनस बिन मालिक ؓ से रिवायत)

खाने की सुन्नतें और आदाब

بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیۡمِ
खाना अल्लाह ताला की बहुत लज़ीज़ नेअमत है । अगर खाना अहमद-ए- मुज्तबा گ की सुन्नतों के मुताबिक़ खाया जाये तो हमें पेट भरने के साथ साथ सवाब भी हासिल होगा । इस लिए हमें चाहिए कि सुन्नत के मुताबिक़ खाना खाने की आदत डालें ।

Friday, 9 December 2016

अल्लाह तआला ने दुनिया में बहुत से नबी और रसूल भेजे। जिन्होंने अपनी क़ौम को इबादत की तरफ बुलाया और एक अल्लाह की इबादत करने को कहा। कुछ लोग उन पर ईमान लाये और उनकी बताई हुई बातों पर अमल किया और अल्लाह के शुक्र गुज़ार बन्दों में शामिल हुए। अल्लाह ने उनको अपने वादे के मुताबिक़ दुनिया और आख़िरत दोनों की नेअमतें अता कीं। लेकिन कुछ लोगों ने अपने नबियों को झुठलाया और अपनी सरकाशी पर डटे रहे ,बुतपरस्ती करते रहे। तो उनको दर्दनाक अज़ाब ने आ घेरा। जिसमे क़ौम-ए-नूह, क़ौम-ए-आद और क़ौम-ए-समूद वग़ैरा का ज़िक्र क़ुरआन पाक में किया गया है। इन्शाल्लाह आगे हम नबियों, उनकी क़ौमों और उनके ज़माने के हालात का बयान करेंगे।
अल्लाह तआला फ़रमाता है-
 “और मैं ने जिन्न और इन्सान को नहीं पैदा किया मगर इसलिये कि वो मेरी इबादत करें , मैं इनसे कुछ रिज़्क़ तलब नहीं करता और न ही चाहता कि वो मुझे खाना दें , बेशक अल्लाह ही बड़ा राज़िक़ बड़ी कुव्वत वाला ज़बरदस्त।”
(सूरह अज़्ज़ारियात, आयत-56-58)
यानि ज़मीन और आसमान और इनकी तमाम नेअमतें इंसानों के लिये पैदा की गईं और यह अल्लाह तआला का अपने बन्दों पर बहुत बड़ा एहसान है। जब बन्दा शुक्रगुज़ारी  करता है तो अल्लाह तआला इनामों को और बढ़ा देता है। ख़ुद क़ुरआन करीम मे अल्लाह ने वादा फ़रमाया है कि “याद रखो कि अगर शुक्रगुज़ार बनोगे तो मैं तुमको और ज़्यादा दूँगा और अगर मेरी नेअमतों का शुक्र अदा नहीं करोगे तो मेरी सज़ा बहुत सख़्त है।”
नबी-ए-करीम گ के इरशाद के मुताबिक़
“अल्लाह तआला ने ज़मीन को इतवार और पीर के दिन, पहाड़ों को और उसमें छिपे हुए ख़ज़ानों और मादनयात (खनिज) को मंगल के दिन पैदा फ़रमाया और पेड़-पौधे, शहर, आबादियाँ, वीरान जगहें बुध के दिन पैदा कीं, जुमेरात को आसमान को पैदा फ़रमाया और जुमे के दिन सूरज,चाँद, सितारे और फ़रिश्तों को पैदा फ़रमाया और जुमे की बची हुई बाक़ी तीन घड़ियों में से पहली घड़ी में लोगों की उमरें और दूसरी घड़ी में आफ़तों और मुसीबतों को पैदा फ़रमाया। तीसरी और आख़िरी घड़ी में आदम ے को पैदा फ़रमाया उनको जन्नत में रिहाइश अता की और फिर फ़रिश्तों को सजदे का हुक्म दिया सब फ़रिश्तों ने सजदा किया लेकिन इब्लीस जो जिन्नों में से था मगर फ़रिश्तों का मुअल्लिम था उसने सजदे से इन्कार किया और उसे इस वजह से उसे जन्नत से निकाल दिया। यह सब जुमे की आख़री घड़ी तक हुआ।”  
ज़मीन और आसमान को बनाने के बारे में बहुत सी आयात बयान की गई हैं लेकिन अब हम इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अपने असली मकसद की तरफ़ आते हैं जिसकी वजह से यह तमाम कायनात बनाई गई।

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