Wednesday, 7 December 2016

इब्ने अब्बासک से रिवायत है कि इंसान को तीन तरह की मिटटी से पैदा किया गया
  1. सलसाल,
  2. हमा,
  3. तीन लाज़िब
“तीन लाज़िब” से मुराद बेहतरीन और उम्दा मिट्टी है, “हमा” से मुराद कीचड़ और “सलसाल” से मुराद ऐसी मिट्टी जिसे कूट कर बारीक किया गया हो यानि ऐसी ख़ुश्क जो खनखनाती हो।
अल्लामा इब्ने कसीर लिखते है अल्लाह तआला ने फ़रिश्तों को मिट्टी लाने का हुक्म दिया। वह मिट्टी आसमानो की तरफ़ ले जाई गई और लेस दार मिट्टी “तीन लाज़िब” से आदम ے को बनाया गया जो इस से पहले बदबूदार मिट्टी “हमा” की शक्ल में थी और इस से पहले वो खुश्क मिट्टी “तुराब” थी।
आदम ے को किस मिट्टी से बनाया गया?
अबु मूसा अश्अरीک से रिवायत है कि रसूलल्लाह گ ने फ़रमाया कि-
“अल्लाह ने आदम ے को एक मुट्ठी मिट्टी से पैदा फ़रमाया जिसको तमाम ज़मीन से लिया गया इस तरह कई जगह की मिट्टी इस्तेमाल होने की वजह से  इन्सान अलग-अलग रंग (जैसे गोरे,काले या साँवले), अलग -अलग आदतों (जैसे ख़ुश अख़लाक़, बद मिजाज़) और अलग ख़सलतों (जैसे नेक व बद) के होते हैं।”
हज़रत इब्ने अब्बासک इस आयत की तफ़्सीर बयान करते हुए फ़रमाते हैं कि-
“फ़रिश्तों ने ऐसा इस लिए कहा कि सबसे पहले ज़मीन पर रहने वाले जिन्नो ने फ़साद बरपा किया, ख़ून बहाया और अल्लाह कि नाफ़रमानी की लिहाज़ा अब जो ख़लीफ़ा बनेगा वो भी वैसा ही करेगा। अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि बेशक तुम नहीं जानते जो मैं जानता हूँ।”
यह बात याद रखनी चाहिए कि फ़रिश्तों का यह कहना एतराज़ के तौर पर नहीं था और न ही आदम ے और उनकी औलाद से हसद के तौर पर क्योंकि क़ुरआन मजीद के मुताबिक़ फ़रिश्ते वह बात नहीं कहते जिसको कहने या पूछने की उन्हें इजाज़त न हो।’
लिहाज़ा जब अल्लाह तआला ने आदम ے को बनाना चाहा तो फ़रमाया कि सारी ज़मीन से मिट्टी लाई जाए और आदम ے के लिये लेसदार चिपकने वाली मिट्टी आसमान की तरफ़ बुलन्द की गई पहले यह मिट्टी गारे की शक्ल में थी फिर इससे ख़मीर उठ गया । लिहाज़ा इस लेसदार और चिपकने वाली मिट्टी से अल्लाह तआला ने आदम  ے का पुतला अपने दस्त-ए-क़ुदरत से बनाया 
हज़रत आदम ے की पैदाइशः-
अल्लाह हर काम  पर क़ादिर है वो चाहे तो पलक झपकते ही तमाम जहानों को पैदा कर सकता है लेकिन इस दुनिया और इंसानों की तख़लीक़ उसने कई मरहलों (Stages) में की जब अल्लाह तआला ने हज़रत आदम ے को पैदा करना चाहा तो फ़रिश्तों से फ़रमाया कि-
” बेशक मैं बनाने वाला हूँ ज़मीन में अपना नायब। उन्होंने कहा तू उसे नायब बनायेगा जो वहाँ फ़साद करें और ख़ून बहाएं और हम तेरी हम्द के साथ तेरी तस्बीह बयान करते हैं और तेरी पाकी बयान करते हैं। फ़रमाया बेशक मैं जानता हूँ जो तुम नहीं जानते।”
(सूरते बक़र आयत 29 ,30 )
इब्ने मसऊद ک, इब्ने अब्बासک और दूसरे सहाबा-ए-किराम की रिवायतों के मुताबिक़-
“जब अल्लाह तआला अपनी अज़ीज़ तरीन मख़लूक़ को बनाने के बाद अपनी शान के मुताबिक़ अर्श पर रौनक़ अफ़रोज़ हुआ तो इब्लीस को  आसमाने दुनिया की बादशाहत पर मुक़र्रर किया। इब्लीस का ताल्लुक़ फ़रिश्तों के उस गिरोह से था जिन्हें जिन्न कहा जाता है। उनका नाम जिन्न इसलिए रखा गया कि वह जन्नत के पहरेदार और हिफ़ाज़त करने वाले थे। इस इज़्ज़त अफ़ज़ाई (सम्मान) से इब्लीस के दिल में तकब्बुर यानि घमण्ड पैदा हो गया यहाँ तक कि उसने यह कह दिया कि अल्लाह तआला ने जो कुछ मुझे अता किया है वह मेरी ज़ाती इबादत और रियाज़त का इनाम और फल है।”
जब अल्लाह तआला ने आदम ے को पैदा फ़रमाया तो फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सजदा करें सबने हुक्म की तामील की लेकिन इब्लीस ने इंकार किया और अल्लाह तआला की नाफ़रमानी की। अल्लाह तआला तमाम भेद जानता है इब्लीस से सवाल किया तुझे किस चीज़ ने आदम को सजदा करने से रोका। उसने जवाब दिया ”मैं आदम से बेहतर हूँ तूने मुझे आग से और आदम को मिट्टी से पैदा किया।” शैतान का जवाब तकब्बुर  और जहालत वाला था। अल्लाह तआला इस पर ग़ज़बनाक हुआ और रान्दहे दरगाह कर दिया यानि अपनी रहमत से निकाल दिया और लानत का तौक़ उसकी गर्दन में डाल दिया। शैतान ने तौबा व इस्तग़फ़ार करने के बजाए अल्लाह तआला से खुली बग़ावत कर दी और क़यामत तक के लिए आदम ے की नस्लों को बहकाने के लिए मोहलत माँग ली। अल्लाह पाक के इल्म और हिकमत का भी यही तक़ाज़ा था कि औलादे आदम की आज़माइश की जाये। लिहाज़ा उसकी दरख़्वास्त मंज़ूर की गई। उसे लम्बी उम्र अता की और साथ में वो सामान भी जो नस्ले आदम को गुमराह करने के लिए चाहिए थे।
इब्ने अब्बासک, के एक दूसरे क़ौल के मुताबिक़-
“इब्लीस आसमाने दुनिया, ज़मीन और उसके दरमियान सब इलाक़े का बादशाह और निज़ाम चलाने वाला था और साथ ही जन्नत की हिफ़ाज़त का भी ज़िम्मेदार था। इब्लीस अल्लाह तआला की बहुत इबादत करता था और उसमें बहुत ज़्यादा तकलीफ़ें उठाता था, इस वजह से वह ख़ुदपसन्दी का शिकार हो गया और अपने आप को बहुत बड़ा और बहुत ऊँचे मर्तबे वाला समझने लगा और आख़िरकार उसने अल्लाह तआला के सामने भी अपने घमण्ड को ज़ाहिर कर दिया। ”
इब्ने अब्बासک, के एक क़ौल के मुताबिक़-
“ज़मीन पर इंसानो की तख़लीक़ से पहले जिन्नात आबाद थे। एक बार उन्होंने ज़मीन पर फ़साद फैलाया, एक दूसरे को क़त्ल किया और ख़ून बहाया। अल्लाह तआला ने इनके फ़साद को ख़त्म करने के लिए इब्लीस को फ़रिश्तों के एक गिरोह के साथ भेजा। यह वह ही गिरोह था जिसे जिन्न कहा जाता है। इब्लीस ने और उन फ़रिश्तों के गिरोह ने इनसे जंग की और इन्हें जज़ीरो और दूर दराज़ के पहाड़ों में धकेल दिया। इस कारनामे से उसमे ग़ुरूर पैदा हो गया। अल्लाह इसके गरूर को जान गया लेकिन फ़रिश्ते न जान सके।”
इब्लीस का घमण्डः-
अल्लाह तआला क़ुरआन पाक में फ़रमाता है कि-
और उनमें जो कहे कि मैं अल्लाह के सिवा माबूद हूँ तो उसे हम जहन्नुम की जज़ा देंगे, हम ऐसी ही सज़ा देते हैं सितमगारों को।
(सूरह अल अम्बिया, आयत- 29)
इस आयत की तफ़सीर में इब्ने जरीह रहमातुल्लाह अलैह लिखते हैं कि-
”फ़रिश्तों में सब से पहले जिसने यह बात कही कि अल्लाह के बजाए मैं माबूद हूँ वो इब्लीस लईन है ” 
हज़रत क़तादह रहमातुल्लाह अलैह  फ़रमाते हैं कि-
“यह आयत अल्लाह के दुश्मन इब्लीस के बारे में उतरी। अल्लाह ने इस पर लानत फ़रमाई और इसे अपनी रहमत से निकाल दिया। और फ़रमाया हम इसे दोज़ख़ की सज़ा देंगे और ज़ालिमों को हम इसी तरह का बदला दिया करते हैं।”
अल्लाह तआला क़ुरआन पाक में एक जगह और इरशाद फ़रमाता है-
“और याद करो जब हमने फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सजदा करो तो सबने सजदा किया सिवाए इब्लीस के, मुन्किर हुआ ग़ुरूर किया और काफ़िर हो गया।)”
(सूरह अलबक़राह, आयत- 34)
इब्लीस को ऐसा घमण्ड क्यों हुआ कि उसने न सिर्फ़ अल्लाह का हुक्म मानने से इन्कार किया बल्कि ख़ुदाई का भी दावा कर बैठा इसके बारे उलमा के बहुत से क़ौल हैं।
शैतान इब्लीस कौन था?
इब्लीस फ़रिश्तों का सरदार था और जन्नत के बाग़ों की देखभाल करता था। उसको दुनिया और आसमान दोनों की बादशाहत मिली हुई थी।
(इब्ने जरीह रहमातुल्लाह अलैह से रिवायत, इब्ने अब्बास ک के हवाले से)
फ़रिश्तों का एक क़बीला जिन्नात से ताल्लुक़ रखता था इब्लीस उन्हीं में से था। इस क़बीले के फ़रिश्तों को आग की गर्म लौ से पैदा किया गया था यह लौ शोले की तरह नज़र नहीं आती लेकिन सिर्फ़ महसूस की जा सकती है और सारी गर्मी इसी में होती है। इस क़बीले के अलावा बाक़ी सब फ़रिश्तों को नूर से पैदा फ़रमाया था। इब्लीस का नाम हारिस था दूसरी रिवायत में अज़ाज़ील भी आया है और यह जन्नत के पहरेदारों में से था।
(इब्ने अब्बास ک की रिवायत)
सब से पहले आदम ے को दुनिया में भेजा गया। हज़रत आदम ے को अबुलबशर यानि सब इन्सानों का बाप कहा जाता है।  दुनिया में जितने भी इन्सान शुरू से आख़िर तक आ चुके हैं या आयेंगे सब हज़रत आदम ے की ही औलाद हैं इसी लिये इन्हें “आदमी” कहा जाता है। जब अल्लाह तआला ने हज़रत आदम ے की पैदाइश का इरादा फ़रमाया और फ़रिश्तों से अर्ज़ किया कि मैं ज़मीन में अपना ख़लीफ़ा बनाने वाला हूँ उस वक़्त ज़मीन में जिन्नात रहते थे और “इब्लीस” की बादशाहत थी लिहाज़ा आपके बारे में कुछ बताने से पहले शैतान इब्लीस का ज़िक्र करना ज़रूरी है क्योंकि इस वाक़िये का शैतान से गहरा ताल्लुक़ है।
इब्लीस-ए-लईनः-
अल्लाह तआला ने इस मख़लूक़ को बहुत ख़ूबसूरत बनाया था और शराफ़त व बुज़र्गी से भी नवाज़ा था। ज़मीन और दुनिया के आसमान की बादशाहत दी थी। इसके अलावा उसे जन्नत की पहरेदारी के इनाम से भी नवाज़ा था। लेकिन उसने अल्लाह के सामने घमण्ड किया और ख़ुदाई का दावा कर बैठा जिसकी वजह से अल्लाह तआला ने उसे अपनी बारगाह से निकाल दिया और उसे शैतान में बदल दिया। उसकी शक्ल बिगाड़ दी और सारे रुतबे जो अल्लाह तआला ने उसे अता किये थे छीन लिये। उस पर अपनी लानत फ़रमाई, उसको अपने आसमानों से निकाल दिया और आख़िरत में उसको और उसकी पैरवी करने वालों का ठिकाना जहन्नुम क़रार दिया। 

नमाज़ की अहमियत और फ़ज़ीलत

بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیۡمِ
अल्लाह तआला क़ुरआन मजीद में नमाज़ का हुक्म फरमाता है-
وَاَقِیۡمُوا الصَّلٰوۃَ وَاٰتُوا الزَّکٰوۃَ وَارْکَعُوۡا مَعَ الرّٰکِعِیۡنَ
(और नमाज़ क़ायम रखो और ज़कात दो और रुकू करने वालों के साथ रुकू करो)
 (सूरह अलबक़रा, आयत- 43)
और फ़रमाया
اِنَّ الصَّلٰوۃَ تَنْہٰی عَنِ الْفَحْشَآءِ وَالْمُنۡکَرِ
(बेशक नमाज़ मना करती है बेहयाई और बुरी बातों से)
(सूरह अलअनकबूत, आयत- 45)
जो शख़्स पाँचों वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ें तमाम शर्तों के साथ सही वक़्तों पर पाबन्दी से अदा करता रहेगा उसके लिये वादा है कि हमेशा अल्लाह की हिफ़ाज़त और आमान में रहेगा। कबीरा (बड़े) गुनाहों से जब आदमी बचा रहता है तो जो भी सग़ीरा (छोटे) गुनाह उससे होते हैं वह पाँचों वक़्त की नमाज़ की बदौलत माफ़ हो जाते हैं।
हुज़ूर सय्यदे आलम گ ने इरशाद फ़रमाया:-
बताओ तो किसी के दरवाज़े पर नहर हो वह उस में हर रोज़ पाँच बार नहाये तो क्या उसके बदन पर मैल रह जाएगा। सिहाबा-ए-किराम ने अर्ज़ की  “नहीं ”। फ़रमाया यही मिसाल पाँचों नमाज़ों की है कि अल्लाह तआला इनके सबब ख़ताओं को मिटा देता है।
(सही मुस्लिम)
नमाज़ के बारे में हुज़ूर सय्यदे आलम گ के फ़रमान हैं किः-
  • इस्लाम में सबसे ज़्यादा अल्लाह के नज़दीक महबूब चीज़ वक़्त में नमाज़ पढ़ना है और जिस ने नमाज़ छोड़ी उस का कोई दीन नहीं नमाज़ दीन का सुतून है।
(शैबुल ईमान)
  • जब तुम्हारे बच्चे सात बरस के हों तो उन्हें नमाज़ का हुक्म दो और जब दस बरस के हो जायें तो मार कर पढ़ाओ।
(सुनन अबू दाऊद)
  • क़यामत के दिन सबसे पहले बन्दे से नमाज़ का हिसाब लिया जायेगा अगर यह सही हुई तो बाक़ी आमाल भी ठीक रहेंगे और यह बिगड़़ी तो सभी बिगड़े। 
(तिबरानी)
  • जन्नत की कुंजी नमाज़ है और नमाज़ की कुंजी तहारत (पाकी)।
(सही मुस्लिम)
  • अल्लाह तआला ने कोई ऐसी चीज़ फ़र्ज़ न की जो तौहीद और नमाज़ से बेहतर हो अगर इससे बेहतर कोई चीज़ होती तो वह ज़रूर फ़रिश्तों पर फ़र्ज़ करता। उनमें कोई रुकू में है कोई सजदे में।

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